Sunday, December 12, 2010

तस्सव्वुर..!!


क्यूँ मेरी बातों से निकले है छन के तन्हाई
ये मेरा दर्द है, मेरी जलन, की तन्हाई
जो मेरे सामने बैठी है बन के तन्हाई
ये मेरा मन ही है या मेरे मन की तन्हाई..!!

ये बात तरके ताल्लुक के बाद आती है
जो मुझसे मिलती है तो होके शाद आती है
क्या ये बता दूं की जिससे निकाह हुआ मेरा
वो मुझको छूती है तो तेरी याद आती है..!!
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7 comments:

रश्मि प्रभा... said...

kuch hatke bhaw ... jo hote to hain , par ... bahut badhiyaa

रश्मि प्रभा... said...

मेरी रूह लौटकर जाना ' परिचय, तस्वीर , ब्लॉग लिंक के साथ भेजो वटवृक्ष के लिए

रश्मि प्रभा... said...

http://urvija.parikalpnaa.com/

saanjh said...

woww....sooooo amazing....sabse pehle to ye jo flow hai na, ye bas zahn mein goonje jaa raha hai...bohot bohot hi surili nazm hai, just fabulous...

phir aata hai aakhiri line ka punch...and it hurts, really, pricks somewhere in the heart...its just toooo good

tumne dil ki kis teh mein jakar ye nazm nikaali hai dost...???

दिगम्बर नासवा said...

क्या ये बता दूं की जिससे निकाह हुआ मेरा
वो मुझको छूती है तो तेरी याद आती है....

प्रेम की इन्तहा .... बैचेनी में करार कैसे आएगा ...
बहुत खूब लिखा है ...

संजय भास्कर said...

प्रेम की इन्तहा

संजय भास्कर said...

सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।