Saturday, September 12, 2009

लम्हे..!!


जीवन मे कुछ भी पलट कर नहीं आता,
जो गुज़र चुका है वो गुज़र गया,

एक तुम...
जिसके जीवन मे
सरसों के फूलों की महक है..
और एक मैं...
जो हथेली पर
सरसों जमाने की कोशिश मे लगा हूँ,

तुम्हारे लिए
वक़्त गुज़र रहा है
मेरे लिए
लम्हे ठहरे हुए हैं..!!

4 comments:

विनय ‘नज़र’ said...

भावना की बाढ़ बहा ले गयी
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Carbon Nanotube As Ideal Solar Cell

संजय भास्कर said...

bahut hi sunder kavita

रश्मि प्रभा... said...

तुम्हारे लिए
वक़्त गुज़र रहा है
मेरे लिए
लम्हे ठहरे हुए हैं..!!
bahut hi alag se bhaw, jo dil ki pagdandiyon se gujar gaye

ओम आर्य said...

तुम्हारे लिए
वक़्त गुज़र रहा है
मेरे लिए
लम्हे ठहरे हुए हैं..!!
bahut hi sundar abhiwyakti hai ......jo jindagi ke karib lagi