Sunday, July 25, 2010

उसकी निगाह..!! (Geet)


उसके दिल कि थी ज़बां उसकी निगाह उसकी निगाह
मेरे उसके दरमियाँ उसकी निगाह उसकी निगाह

इन दिलों के फासले कुछ कम किये जा सकते थे
ज़िन्दगी से छुप के भी कुछ पल जिए जा सकते थे
इक दफा करती जो हाँ उसकी निगाह उसकी निगाह

मेरे उसके दरमियाँ उसकी निगाह उसकी निगाह

जाने वाली हर लहर फिर लौटकर आई नहीं
वो गयी उसकी खबर फिर लौटकर आई नहीं
रह गयी लेकिन यहाँ उसकी निगाह उसकी निगाह

मेरे उसके दरमियाँ उसकी निगाह उसकी निगाह

मंदिरो मस्जिद मे उससे मिलने ही जाता था मैं
इक खुदा के वास्ते काफिर बना जाता था मैं
उन दिनों पाँचों अजाँ, उसकी निगाह उसकी निगाह

मेरे उसके दरमियाँ उसकी निगाह उसकी निगाह

उसको अपने दिल से बढ़कर जाँ समझ बैठा था मैं
था गलत जो उसकी ना को हाँ समझ बैठा था मैं
था गलत वो तर्जुमाँ, उसकी निगाह उसकी निगाह

मेरे उसके दरमियाँ उसकी निगाह उसकी निगाह..!!
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5 comments:

Din said...

जाने वाली हर लहर फिर लौटकर आई नहीं
वो गयी उसकी खबर फिर लौटकर आई नहीं
रह गयी लेकिन यहाँ उसकी निगाह उसकी निगाह


Gaurav Bhai ye panktiyaan dheere dheere dil me utar jaati hai,aur fir ek khamosh si dhun chhedti hai aur bas us sangeet mein doob jaane ka mann karta hai...bahut sundar geet hai :))

misir said...

गौरव जी,
गीत में सच्चे हृदयोद्गार ,सहज भाषा
और सुन्दर शैली में प्रस्तुत किये आपने ,
बहुत बधाई !

saanjh said...

उन दिनों पाँचों अजां, उसकी निगाह...........

there u go...same old killer ar'nt u ;)

bohot pyaari nazm hai...its lovely
kaise ho dost...

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

बहुत ही खूबसूरत अहसास, जो लफ्जों के संग दिल से उतरे, और ब्लॉग पर बिखर गए खुशबू कि तरह.....

शुभकामनाये....

Hussain Haidry said...

Bahut hi umda Nazm! Kya bahar hai aur kya khhobssorat radeef hai - 'uski nigaah, uski nigaah'!