Wednesday, July 11, 2012

Ghazal



Agar zindagi mujhse naashaad hogi
to ye hi mere fan ki bunyaad hogi

kahaan jaayegi? tere dar pe ya jannat?
meri rooh jab mujhse aazaad hogi

yehi soch kar apna dil toR dala
na basti basegi na barbaad hogi

tabassum labon par rahega humesha
puraanii dabi jismein faryaad hogi

mere gham pe koi kahaani likhe to
humaari mohabbat ki roodaad hogi


na paisa, na sapne, na mazhab, na jhagde
'ye dunya mohabbat se aabaad hogi'
 
miraa 'lams' tere badan pe rahega
sahaare se jiske meri yaad hogi..!!
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अगर ज़िन्दगी मुझसे नाशाद होगी
तो ये ही मेरे फन की बुन्याद होगी

कहाँ जाएगी? तेरे दर पे या जन्नत?
मेरी रूह जब मुझसे आज़ाद होगी

ये ही सोच कर अपना दिल तोड़ डाला
न बस्ती बसेगी, न बर्बाद होगी

तबस्सुम लबों पर रहेगा हमेशा
पुरानी दबी जिसमे फरयाद होगी

मेरे गम पे कोई कहानी लिखे तो
हमारी मोहब्बत की रूदाद होगी

न पैसा, न सपने, न मज़हब, न झगड़े
ये दुनिया मोहब्बत से आबाद होगी

मिरा 'लम्स' तेरे बदन पर रहेगा
सहारे से जिसके मेरी याद होगी..!!

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4 comments:

yogesh dhyani said...

कहाँ जाएगी? तेरे दर पे या जन्नत?
मेरी रूह जब मुझसे आज़ाद होगी


न पैसा, न सपने, न मज़हब, न झगड़े
ये दुनिया मोहब्बत से आबाद होगी

bahut badhiya gazal kahi hai gaurav bhai,aur khaskar ye do sher to bahut pasand aaye

सदा said...

वाह ... बहुत खूब।

expression said...

वाह वाह....
तबस्सुम लबों पर रहेगा हमेशा
पुरानी दबी जिसमे फरयाद होगी

बहत खूब....

अनु

Lams said...

Aap sabka bahut bahut shukria