अब नयी दिल में आरज़ू होगी
जिससे हर रोज़ गुफ्तुगू होगी
फिर से परवाने को जीना होगा
फिर से शम्मा की जुस्तुजू होगी
वो कोई और है जो तू अब है
वो कोई और है जो तू होगी
दिल जो टूटा था उसके क्या मानी
मुझ में जीने की आरज़ू होगी
फिर कोई तुझसा दिख गया मुझको
फिर से ग़ज़लों में तू ही तू होगी
जिससे हर रोज़ गुफ्तुगू होगी
फिर से परवाने को जीना होगा
फिर से शम्मा की जुस्तुजू होगी
वो कोई और है जो तू अब है
वो कोई और है जो तू होगी
दिल जो टूटा था उसके क्या मानी
मुझ में जीने की आरज़ू होगी
फिर कोई तुझसा दिख गया मुझको
फिर से ग़ज़लों में तू ही तू होगी
'लम्स' क्या शक्ल है उदासी की
वो तो हमशक्ल-ए-आरज़ू होगी?
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This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivs 3.0 Unported License.

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3 comments:
achchi gazal huyi hai gaurav...........
good one
good one ............this ghazal is for whom????????
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