Tuesday, January 26, 2010

तेरे होने से..!!



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खुलूस-ए-नज़र, हसरत-ए-जिगर, तेरे होने से,
रहमत-ए-अदा, है जिंदा बशर, तेरे होने से,

सहरा मे मैं, हूँ सूखा शजर, तू दरिया कोई
हूँ बदहाल पर, लगता है समर, तेरे होने से,

वो एक नीम शब्, बहा डाले थे, सभी खाब फिर,
अब इन आँखों मे, रहती है सहर, तेरे होने से,

सुकूं था जो एक संग सीने मे दबा रखा था
उसमे भी अब, होता है असर, तेरे होने से,

ये एहसान अब, तेरा लम्स पर, रहेगा सदा
फिर परवाज़ है ओ हैं बालो पर तेरे होने से..!!
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5 comments:

sada said...

बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

संजय भास्कर said...
This comment has been removed by a blog administrator.
संजय भास्कर said...

behtreen rachaa,,,

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi shaandaar....

pukhraaj said...

भावनाओं की खूबसूरत अभिव्यक्ति ...